अच्छी सेहत सिर्फ खाने से नहीं जुड़ी, खाना पकाने के बर्तन भी निभाते हैं बड़ी भूमिका I
आयुर्वेद और विज्ञान दोनों मानते हैं कि सही बर्तनों में पका खाना शरीर को अंदर से स्वस्थ रखता है।
जब खाना पकाने की बात आती है, तो आयुर्वेद का नजरिया बेहद सरल है—जितना हो सके, प्रकृति के करीब रहें। आयुर्वेद मानता है कि सही बर्तनों में बना खाना ज्यादा “जीवंत” होता है और शरीर उसे आसानी से पचा पाता है। इसलिए अगली बार जब आप किचन में जाएं, तो यह याद रखें कि अच्छी सेहत सिर्फ खाने की चीज़ों पर नहीं, बल्कि उन बर्तनों पर भी निर्भर करती है जिनमें आप खाना पकाते हैं।
हेल्थ एक्सपर्ट डिंपल जांगड़ा के अनुसार, कुछ पारंपरिक बर्तन ऐसे हैं जिन्हें आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही रसोई का “वीआईपी” मानते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में—
मिट्टी के बर्तन
मिट्टी के बर्तनों में खाना धीरे-धीरे पकता है। यह धीमी आंच न सिर्फ स्वाद को बेहतर बनाती है, बल्कि भोजन में मौजूद पोषक तत्वों को भी सुरक्षित रखती है।
लोहे के बर्तन
कास्ट आयरन या लोहे के बर्तनों में बना खाना शरीर को आयरन भी देता है। यह खून की सेहत सुधारने के साथ-साथ पाचन तंत्र के लिए भी फायदेमंद माना जाता है।
तांबे के बर्तन
तांबे के बर्तनों का सही तरीके से इस्तेमाल करने पर ये पानी को प्राकृतिक रूप से शुद्ध करते हैं। साथ ही, ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में भी मदद करते हैं।
स्टेनलेस स्टील
स्टेनलेस स्टील मजबूत, टिकाऊ और सुरक्षित होता है। यह शरीर पर किसी तरह का नकारात्मक असर नहीं डालता और रोज़मर्रा के इस्तेमाल के लिए एक भरोसेमंद विकल्प है।
नॉन-स्टिक पैन को कहें अलविदा
अक्सर इस्तेमाल होने वाले नॉन-स्टिक पैन से कुछ रसायन खाने में मिल सकते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं। ऐसे में बेहतर है कि इनसे दूरी बनाकर पारंपरिक और सुरक्षित बर्तनों को अपनाया जाए।
विज्ञान भी करता है समर्थन
आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि प्राकृतिक बर्तन खाना समान रूप से गर्म करते हैं और पोषक तत्वों को नष्ट होने से बचाते हैं। इनमें पकाया गया भोजन ज्यादा स्वादिष्ट, हल्का और सेहतमंद होता है, जिससे पाचन बेहतर रहता है और शरीर का संतुलन बना रहता है।
मेडिकल डिस्क्लेमर:
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Reviewed by: Daksho Health Editorial Team
Last Updated: 24 Dec, 2025