डायबिटीज होने पर बिना ज़रूरी जानकारी के प्रेग्नेंसी प्लान करना आगे चलकर गंभीर दिक्कतें दे सकता है।
बिना सही जानकारी के प्रेग्नेंसी प्लानिट करना क्यों बढ़ा सकता है जोखिम
प्रेग्नेंसी सिर्फ एक महिला नहीं, बल्कि पूरे कपल के लिए बेहद महत्वपूर्ण चरण होता है। इस नए सफ़र की शुरुआत से पहले कई बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है। खासकर यदि आपको डायबिटीज है, तो माँ और बच्चे दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त सावधानी बेहद आवश्यक हो जाती है।
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, वैशाली की ऑब्सटेट्रिक्स एवं गाइनेकोलॉजी, गाइनीकोलॉजिक और लेप्रोस्कोपी विभाग की डायरेक्टर, डॉ. हेमांगी नेगी के अनुसार, सही मेडिकल मार्गदर्शन और उचित प्लानिंग के साथ टाइप 1, टाइप 2 या प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली डायबिटीज (जेस्टेशनल डायबिटीज) के बावजूद भी ज्यादातर महिलाएँ एक हेल्दी प्रेग्नेंसी और बेहतर परिणाम हासिल कर सकती हैं।
ब्लड शुगर लेवल का संतुलित होना है बेहद ज़रूरी
उन्होंने बताया कि गर्भधारण से पहले सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपका ब्लड शुगर लेवल पूरी तरह नियंत्रित हो और आप अपने डॉक्टर के साथ मिलकर एक स्पष्ट योजना तैयार कर लें। अक्सर लोग इस बात को नज़रअंदाज़ कर देते हैं कि प्रेग्नेंसी के शुरुआती हफ्ते—कई बार तो महिला को पता चलने से पहले ही—बच्चे के अंगों के सही विकास के लिए बेहद संवेदनशील और अहम होते हैं।
इसी कारण, गर्भधारण की योजना बना रहे डायबिटीज़ मरीजों को सलाह दी जाती है कि वे पहले अपने डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। इससे डॉक्टर आपकी दवाओं की समीक्षा कर सकते हैं, ब्लड शुगर लेवल का आकलन कर सकते हैं और संभावित जोखिमों को प्रेग्नेंसी शुरू होने से पहले ही काफी हद तक कम किया जा सकता है।
प्रेग्नेंसी के दौरान कुछ दवाएं हानिकारक साबित हो सकती हैं
कंसीव करने की कोशिश करने से पहले HbA1c लेवल को 6.5% से नीचे लाना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, ताकि लो ब्लड शुगर की समस्या के बिना स्वस्थ रूप से गर्भधारण किया जा सके। ग्लूकोज लेवल को नियंत्रित रखना न सिर्फ फर्टिलिटी को सपोर्ट करता है, बल्कि मिसकैरिज, जन्मजात विकार, समय से पहले डिलीवरी और प्रीक्लेम्पसिया जैसे जोखिमों को कम करने में भी मदद कर सकता है।
टाइप-2 डायबिटीज़ से पीड़ित कई महिलाओं को हेल्दी प्रेग्नेंसी की तैयारी में कुछ मौखिक दवाओं में बदलाव की आवश्यकता पड़ सकती है, क्योंकि कुछ दवाएं प्रेग्नेंसी के दौरान सुरक्षित नहीं मानी जातीं। ऐसे मामलों में डॉक्टर दवाओं को समायोजित कर सकते हैं या ज़रूरत पड़ने पर इंसुलिन का विकल्प सुझा सकते हैं।
सही डाइट रखना है बेहद जरूरी
प्रेग्नेंसी की तैयारी के दौरान संतुलित और पौष्टिक आहार लेना बहुत महत्वपूर्ण होता है। कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट, लीन प्रोटीन और हेल्दी फैट से भरपूर डाइट ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद करती है।
कई हेल्थ एक्सपर्ट महिलाओं को सामान्य से अधिक फोलिक एसिड लेने की सलाह देते हैं, क्योंकि यह न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट्स के जोखिम को कम कर सकता है—यह जोखिम अनियंत्रित ब्लड शुगर वाली महिलाओं में अधिक देखा जाता है।
इन बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है
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नियमित और संतुलित भोजन करें, स्नैक्स और पोर्शन साइज पर नज़र रखें।
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वेट मैनेजमेंट बेहद महत्वपूर्ण है। हेल्दी BMI होने से शरीर इंसुलिन का बेहतर उपयोग कर पाता है, पीरियड साइकिल नियमित रहती है और फर्टिलिटी बेहतर होती है।
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टाइप-2 डायबिटीज़ या PCOS से पीड़ित महिलाओं के लिए थोड़ा सा वजन कम होना भी काफी लाभदायक हो सकता है।
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चलना, तैरना या हल्की एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ, जो प्रेग्नेंसी में सुरक्षित मानी जाती हैं, शरीर पर अधिक दबाव डाले बिना फिट रखने में मदद करती हैं।
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डायबिटीज़ से जुड़ी लंबे समय तक चलने वाली हेल्थ कंडीशन पर भी ध्यान देना जरूरी है।
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प्रेग्नेंसी से पहले आंखों की जांच, किडनी फंक्शन, ब्लड प्रेशर और थायरॉइड की जांच करवाना फायदेमंद होता है।
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आंखों या किडनी की समस्या समय पर जांच न कराने पर बढ़ सकती है, जबकि अनियंत्रित BP या थायरॉइड समस्याएं प्रेग्नेंसी के दौरान जटिलताएं पैदा कर सकती हैं।
मेडिकल डिस्क्लेमर:
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Reviewed by: Daksho Health Editorial Team
Last Updated: 24 Dec, 2025