शरीर में क्यों घट रहा है विटामिन-डी? इसके पीछे हो सकती हैं ये 8 आम वजहें
धूप के अलावा आपकी रोज़मर्रा की आदतें और सेहत से जुड़ी बातें भी विटामिन-डी की कमी की बड़ी वजह बन सकती हैं।
विटामिन-डी की कमी आज लाखों लोगों की आम समस्या बन चुकी है। अक्सर माना जाता है कि इसकी वजह सिर्फ धूप की कमी है, लेकिन सच इससे कहीं ज्यादा है। शरीर में विटामिन-डी कम होने के पीछे कई छोटे-बड़े कारण एक साथ काम करते हैं।
भारत जैसे धूप वाले देश में भी बड़ी आबादी विटामिन-डी की कमी से जूझ रही है। इसके चलते इम्युनिटी कमजोर होना, हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द, थकान और उदासी जैसे लक्षण दिखने लगते हैं। सवाल यह है कि भरपूर धूप मिलने के बावजूद यह कमी क्यों होती है?
असल में, विटामिन-डी का स्तर हमारी दिनचर्या, खानपान, उम्र और सेहत से जुड़ी कई बातों पर निर्भर करता है। आइए जानते हैं वे आम वजहें, जिनके कारण शरीर विटामिन-डी सही मात्रा में नहीं बना पाता।
धूप में कम समय बिताना
विटामिन-डी का सबसे प्राकृतिक स्रोत सूरज की रोशनी है, लेकिन आजकल ज्यादातर लोग दिन का बड़ा हिस्सा घर या ऑफिस में बिताते हैं। ऊपर से सनस्क्रीन, पूरी बाजू के कपड़े और बढ़ता प्रदूषण भी धूप से मिलने वाले विटामिन-डी को कम कर देता है।
खानपान में कमी
विटामिन-डी वाले खाद्य पदार्थ सीमित हैं। मछली, अंडा, मशरूम, कॉड लिवर ऑयल और फोर्टिफाइड दूध जैसी चीजें अगर डाइट में नियमित न हों, तो शरीर को पर्याप्त विटामिन-डी नहीं मिल पाता।
त्वचा का रंग
गहरे रंग की त्वचा में मेलेनिन ज्यादा होता है, जो सूरज की किरणों को अंदर जाने से रोकता है। ऐसे लोगों को हल्की त्वचा वालों की तुलना में ज्यादा समय तक धूप में रहना पड़ता है।
उम्र बढ़ना
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर की विटामिन-डी बनाने और उसे एक्टिव रूप में बदलने की क्षमता कम होती जाती है। यही वजह है कि बुजुर्गों में इसकी कमी ज्यादा देखी जाती है।
मोटापा
विटामिन-डी फैट में घुलने वाला विटामिन है। शरीर में फैट ज्यादा होने पर यह फैट सेल्स में फंस जाता है और खून में इसकी उपलब्धता कम हो जाती है।
कुछ बीमारियां और दवाएं
आंत, किडनी या लीवर से जुड़ी बीमारियां विटामिन-डी के अवशोषण को प्रभावित कर सकती हैं। साथ ही कुछ दवाएं भी इसके मेटाबॉलिज्म में रुकावट डालती हैं।
मौसम और स्थान
सर्दियों में या भूमध्य रेखा से दूर रहने वाले इलाकों में सूरज की किरणें कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे विटामिन-डी बनना कम हो जाता है।
प्रेग्नेंसी और ब्रेस्टफीडिंग
गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान महिलाओं को ज्यादा विटामिन-डी की जरूरत होती है। कमी होने पर इसका असर मां के साथ-साथ बच्चे पर भी पड़ सकता है।
इन वजहों को समझकर समय रहते सही डाइट, धूप और डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लेना विटामिन-डी की कमी से बचने का सबसे अच्छा तरीका है।
मेडिकल डिस्क्लेमर:
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Reviewed by: Daksho Health Editorial Team
Last Updated: 24 Dec, 2025