हर किसी को अच्छे स्वास्थ्य का अधिकार है।
नींद की पसंद कोई आदत नहीं, दिमाग और सेहत से जुड़ा संकेत है
Date: 31 Oct, 2025

बिस्तर की एक ही साइड पर क्यों आती है सबसे अच्छी नींद—लेफ्ट हो या राइट, वजह जानिए

नींद की पसंद कोई आदत नहीं, दिमाग और सेहत से जुड़ा संकेत है

रात ढलते ही लाइट बंद होती है और दिनभर की थकान लेकर पति-पत्नी बिस्तर पर आते हैं। तभी एक छोटी-सी नोकझोंक शुरू हो जाती है—
“अरे, ये मेरी साइड है!”
“क्या फर्क पड़ता है, बिस्तर तो एक ही है!”

सुनने में भले मज़ाक लगे, लेकिन हकीकत यही है कि फर्क पड़ता है। थोड़ी-सी खींचतान के बाद दोनों फिर अपनी-अपनी तय जगह पर लौट आते हैं।

अगर यह सीन आपको जाना-पहचाना लग रहा है, तो आप अकेले नहीं हैं। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि बिस्तर की एक खास साइड चुनना कोई इत्तेफ़ाक नहीं होता। इसके पीछे हमारी आदतें, मन और दिमाग की गहरी प्रोग्रामिंग काम करती है। आइए समझते हैं क्यों।

सोने का तरीका और सेहत का रिश्ता

रिसर्च बताती है कि दुनिया के करीब आधे लोग करवट लेकर सोना पसंद करते हैं। यह रीढ़ के लिए फायदेमंद होता है और नींद भी बेहतर आती है। लेकिन हर करवट का असर अलग होता है।

  • दाईं करवट: माना जाता है कि इससे शरीर के अहम अंगों पर दबाव कम पड़ता है और नींद गहरी आती है।

  • बाईं करवट: एसिडिटी, गैस या रिफ्लक्स की समस्या में यह साइड ज्यादा आराम देती है। प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए भी यही साइड बेहतर मानी जाती है।

  • पीठ के बल सोना: इस पोज़िशन में खर्राटे और स्लीप एपनिया का खतरा बढ़ सकता है, जिससे नींद बार-बार टूटती है।

सुरक्षा की भावना और दिमाग का खेल

बिस्तर की साइड चुनना सिर्फ आराम की बात नहीं है। इसमें सुरक्षा का एहसास भी जुड़ा होता है। कुछ लोगों को दीवार की तरफ सोकर सुकून मिलता है, तो कुछ दरवाजे के पास रहना पसंद करते हैं।

मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक, दरवाजे के पास सोने वाले लोग खुद को अनजाने में ‘रक्षक’ की भूमिका में देखते हैं या उन्हें भागने का रास्ता पास रखना अच्छा लगता है। ठीक वैसे ही जैसे हम ऑफिस या क्लास में एक ही सीट पर बैठना पसंद करते हैं—दिमाग को वही जगह सुरक्षित और जानी-पहचानी लगती है।

आपकी साइड, आपकी पर्सनालिटी

हैरानी होगी, लेकिन आपकी पसंदीदा साइड आपकी पर्सनालिटी की झलक भी देती है। एक स्टडी में पाया गया कि बाईं ओर सोने वाले लोग ज़्यादा खुशमिज़ाज और पॉज़िटिव होते हैं, जबकि दाईं ओर सोने वाले लोग थोड़े ज़्यादा अनुशासित और रूटीन पसंद करने वाले होते हैं।

अक्सर कपल्स रिश्ते की शुरुआत में ही अपनी-अपनी साइड तय कर लेते हैं, और फिर सालों तक वही चलती रहती है।

दिमाग की सफाई में भी मदद

कुछ रिसर्च यह भी इशारा करती हैं कि करवट लेकर सोना दिमाग के ‘वेस्ट क्लीनिंग सिस्टम’ के लिए फायदेमंद हो सकता है। इससे दिमाग में जमा टॉक्सिन्स बाहर निकलने में मदद मिलती है और भविष्य में याददाश्त से जुड़ी समस्याओं का खतरा कम हो सकता है।

साइड बदलना क्यों लगता है मुश्किल?

जब एक बार आपकी ‘फेवरेट साइड’ तय हो जाती है, तो उसे बदलना आसान नहीं होता। इसे मसल मेमोरी और आदत का असर कहा जाता है। दिमाग उस खास जगह को नींद और सुरक्षा से जोड़ लेता है। यही वजह है कि होटल या नए घर में साइड बदलने पर हमें अजीब-सी बेचैनी महसूस होती है।

तो अगली बार अगर बिस्तर पर अपनी साइड को लेकर बहस हो जाए, तो समझ लीजिए—यह सिर्फ ज़िद नहीं, दिमाग और आदतों का खेल है।

मेडिकल डिस्क्लेमर:
Daksho पर उपलब्ध जानकारी केवल शैक्षिक और सामान्य सूचना के उद्देश्य से है। यह किसी भी प्रकार से पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या बीमारी से संबंधित प्रश्नों के लिए हमेशा योग्य चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें। इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी के आधार पर पेशेवर चिकित्सा सलाह को नज़रअंदाज़ न करें।

Reviewed by: Daksho Health Editorial Team

Last Updated: 24 Dec, 2025

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